देश की आत्मा अयोध्या के स्वर्णिम गरिमा एवं भव्यता को पुनर्स्थापना हेतु आगे बढ़ें

प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी अध्यात्म, संस्कृति एवं लोक परंपरा का आयोजन अयोध्या पर्व 16, 17 और 18 अप्रैल 2022 को मनाया जाएगा. आप सभी सपरिवार सादर आमंत्रित है| स्थान : गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजघाट, नई दिल्ली संपर्क : 9868362658

अयोध्या पर्व 2022  कार्यक्रम विवरण एवं रूपरेखा के लिए यहाँ क्लिक करें 

परिचय

योध्या एक छोटे से स्थान में सिमटा हुआ हिंदुओं का तीर्थस्थल ही नहीं, और भी बहुत कुछ है। यह एक विचार है, एक आदर्श है जिसने मर्यादा परुषोत्तम राम को आकार दिया। संस्कृति की शिला पर अयोध्या हर युग में स्वर्णिम हस्ताक्षर करती रही है। संस्कृति एवं सभ्यता का जिस बिन्दु से प्रारम्भ होता है, कमोबेश उतनी पुरानी है अयोध्या। आदि से लेकर आज तक चेतना के गौरीशकरों के प्रसव की उर्वर भमिू रही है अयोध्या। कला, साहित्य, संगीत, अध्यात्म और राजनीति, हर क्षेत्र में अपने युग में यह अयोध्या “नव-व्याकरण” की रचना करती रही है।

राम और अयोध्या भारत की आत्मा हैं। यदि किसी को भारत को समझना है तो उसे राम और अयोध्या को जानना ही होगा। अयोध्या, राम और भारत तीनों एक-दसरे में समाये हुए हैं। किसी एक को हटाकर शेष को समझने का प्रयास करना नासमझी है। आज जरूरत इस बात की है कि भारत को अयोध्या और राम के विस्तारित स्वरूप में जाना और समझा जाए। वास्तव में अयोध्या वह स्मृति पुंज है जिसकी रोशनी में हमारा देश स्मृति भ्रंस की त्रासदी से मुक्त हो सकता है।

श्री अयोध्या न्यास संस्था इसी दिशा में अयोध्या के गरिमा एवं भव्यता को पुनर्स्थापित करने हेतु एक छोटा सा प्रयास है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि स्वर्णिम अतीत का विस्मरण वर्तमान को बाधित कर देता है, जिसके कारण सुनहरे भविष्य की स्वर्णिम रश्मियां धूमिल हो जाती हैं। अयोध्या पर्व के द्वारा भविष्य की उन्हीं स्वर्णिम रश्मियों को हम और तेजी के साथ फैलाना चाह रहे हैं। अवधपुरी और उससे एकाकार हुए भारत का सांस्कृतिक सौंदर्य लोगों की आखों में सजने लगे, तैरने लगे, लोगों के मानस को मथने लगे, यही अयोध्या पर्व का मूल उद्देश्य है।

सूचना / गतिविधियाँ

विचार एवं लेख

अयोध्या के धरोहर

मीडिया कवरेज

2017
स्थापना वर्ष
2
अयोध्या पर्व आयोजित
80000
सम्मिलित लोग

सहयोगी

टेस्टीमोनियल

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श्री राम बहादुर राय

अध्यक्ष, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र
अयोध्या आंदोलन के सृजनात्मक पक्ष अनेक हैं। अनंत हैं। आंदोलन की पूर्णाहुति के पश्चातइस पक्ष पर ध्यान दिया जाने लगा है। लेकिनजब कभी इसका अध्ययन होगा और जानने का प्रयास होगा कि आंदोलन की पूर्णाहुति से पहले ही उसके सृजन पक्ष को केंद्र में रखकर पहली पहल किसने की और कब की, उसका स्वरूप क्या था? इसका उत्तर है- अयोध्या पर्व। यह अयोध्या के आत्म-परिचय का प्रयास है।
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Dattatreya Hosabale

Joint General Secretary, RSS
पिछले अयोध्या पर्व और इस बार के अयोध्या पर्व में एक अंतर है। अयोध्या परंपरा से सांस्कृतिक धरोहर से चरित्र से इतिहास से सब प्रकार से वह राम जी की जन्मभूमि है। लेकिन उसे विवादित करके रखा गया था। आज तक विवादित भूमि कहते थे। ये कब तक विवाद से मुक्त होगा। लेकिन पिछले एक वर्ष से इसमें जो परिवर्तन आया है इस कारण से आज का यह अयोध्या पर्व विशेष महत्व रखता है। अयोध्या के बारे में भारतीय लोगों ने मोक्षदायिनी नगरों में पहला स्थान है।